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साधु, साधक, सिद्ध, संत और शैतान

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                 साधु, साधक, सिद्ध, संत और शैतान..  इन पांचों की राशि  तो एक ही होती है परंतु इन सब का स्वभाव और कार्य करने के तरीके अलग-अलग होते हैं। जिनमें से साधु एक परोपकारी प्रवृत्ति के व्यक्ति होते हैं और साधक एक किसी भी साधना में निश्चित समय के लिए वह चाहे तंत्र मंत्र या वैज्ञानिक जो भी हो  उसमें क्रियाशील व्यक्ति को  कहा जाता है, जो भी उसने कोई अपनी साधना का लक्ष्य बनाया होता है, उसकी प्राप्ति के लिए, वह अपना  उद्यम करता रहता है और साधक कहलाता है।  अपनी साधना में पूर्ण होने पर, योग और तंत्र की भाषा में, वह  सिद्ध कहलाता है। और संत वह महापुरुष होते हैं, जो संसार से पार हो चुके होते हैं। वह ज्ञान की  उस अंतिम अवस्था पर पहुंच चुके होते हैं जहां और कुछ प्राप्त करना शेष नहीं रहता। और शैतान जैसा कि नाम में ही छुपा है एक शरारती आत्मा या शक्ति और हमारा अपना मन भी जो कि सही गलत का विचार न करके किसी भी कार्य को करना और करवाना, इस प्रकार हमारा मन भी शैतानी हो  सकता  ...

जीवन में भर लो रंग सच्चे दोस्तों के संग।

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  जीवन में भर लो रंग सच्चे दोस्तों के संग!!                 जितने सच्चे और गहरे हमारे दोस्त हैं! जीवन में उतना ही खुशियों का रंग भरा रहता है! जब यह शब्द मित्र! हमारे सामने आता है, तो हमें एक गहरे अपनेपन और साथ ही साथ एक सुरक्षा का भी एहसास होने लगता है। व्यक्ति के घर से बाहर  निकलने पर उसकी पहली आवश्यकता उसके अपने मित्र ही होते हैं। जिनके साथ वह हर अच्छे बुरे पलों को व्यतीत करता है।हमारे भीतर से हमारा  मन  भी फोरन कह देता है, कोई भी दिक्कत आ रही है, तो क्या हुआ अपने दोस्त  हैं  न! दिल में हमेशा एहसास रहता है, कि  दोस्त खड़े हैं!  यह  मुश्किल क्या करेगी ? अपने दोस्त के बारे में हमारी सोच कहती  है कि उसके पास या मेरे पास कितना पैसा है, इस बात का ख्याल तो हम कभी करते ही नहीं, हम तो बस एक ही बात जानते हैं  कि हम जो भी हैं जितना भर भी है और कैसी भी परिस्थिति हो दोनों एक साथ खड़े हो जाते हैं! और एक दूसरे के काम आते  हैं, और हमेशा आएंगे। नित्य शाम को या जब  भी...

जीवन दर्शन और ज्ञान

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                दोस्तों जीवन में क्या जरूरी है और क्या नहीं? लेकिन एक चीज बहुत जरूरी है और वह है खुशी! और उसके लिए जरूरी है कि हम अपना सर्वोत्तम प्रयास करें, ऐसा भी आवश्यक नहीं है कि हम ऐसे कार्य करें जिससे कि हमें दूसरे लोग बहुत अच्छा  कहें,  हमें तो केवल अपनी रुचि के और अपने कर्तव्य को पूरा करने वाले कार्यों को ही करते रहना है। दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं हमें इस बात  से बिल्कुल भी परेशान नहीं होना है। हमें तो निर्भय और बेधड़क होकर अपने मार्ग पर आगे बढ़ते जाना है। हमें दूसरों  कि सोच का कैदी नहीं बनना है। हमें अपनी सोच को ही विकसित और इतना मजबूत बनाना है कि हम किसी भी स्थिति में निसंकोच  कह सकें कि कोई भी कार्य है, मैं कर सकता हूं। मैं नहीं कर सकता, ऐसा मेरे मन में ना तो कोई विचार है और ना ही कभी होगा, यही मेरा निश्चय है।  दोस्तों जब हम किसी भी कार्य को आरंभ कर  रहे हैं, उस समय मेरा पहला कदम  मेरी सोच ही है  कि मैं यह सब कर सकता हूं। मैं अपने समस्त कार्य करने में...

जीवन दर्शन और संघर्ष।

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               दोस्तों जीवन एक खेल है , एक फिल्मी गाना भी खूब प्रचलित रहा है जिसमें गाया गया है कि  जिंदगी है खेल कोई पास कोई फेल अनाड़ी है कोई खिलाड़ी है कोई। मित्रों! जिंदगी को एक खेल की तरह जीना, जीवन जीने का  एक बहुत ही सुंदर तरीका है, जब हम विचार शुरू करते हैं, तो समझ में आता है कि वास्तव में  जीवन एक खेल ही तो है , लेकिन साथ ही जीवन एक संघर्ष भी है, जो कि इस खेल के साथ- साथ ही चलता है। मित्रों हमारे चारों ओर संघर्ष ही संघर्ष सदैव मौजूद  है । जैसे कि जब हम  आपस में खेलते हैं  तो वहां भी एक संघर्ष कहे  या एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ हमेशा मौजूद रहती  है।               जब हम किसी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो वहां भी एक संघर्ष सदैव मौजूद रहता है। हम जब अपने स्कूल, विद्यालय या कॉलेज  में पढ़ाई शुरू करते हैं तो हम वहां भी अपने अज्ञान से संघर्ष करते हुए ज्ञान की ओर आगे बढ़ते  हैं,  लेकिन हम तब ही बढ...

जीवन दर्शन और प्रेम

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               दोस्तों जीवन विज्ञान और दर्शन के इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। दोस्तों जीवन दर्शन में क्या प्रेम का भी कोई स्थान है तो आप समझ ले कि बिल्कुल है और मैं तो कहता हूं कि वह बहुत जरूरी है। दोस्तों प्रेम हर जगह जरूरी है।  पहले तो हमें ज्ञान से ही प्रेम करना और आना चाहिए । हमें प्रकृति से भी प्रेम होना चाहिए हमें अपनी प्रेमिका से भी प्रेम होना चाहिए क्योंकि यदि हम एक पुरुष हैं तो हमारी प्रेमिका हमारी जीवनसंगिनी हमारी प्रकृति है और हमारी प्रकृति के भीतर भी वही चैतन्य है जो  हमारे भीतर है जो आत्मा हमारे भीतर है वही हमारी प्रेमिका के भीतर भी है। यदि हम ज्ञान में गहरे प्रवेश करते हैं तो हम जान पाते हैं कि सब की आत्मा एक ही है और एक ही  चैतन्य सबके भीतर समाया हुआ है और हम सभी जीव उसकी बूंदे हैं।  इस प्रकार मेरी प्रेमिका के भीतर वही सब कुछ है जो मेरे भीतर है।                 दोस्तों प्रेम करना और हमारे मन का प्रेम से भरा हो...

जीवन दर्शन और विज्ञान

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               जीवन दर्शन और विज्ञान इन तीन शब्दों में संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है। इस सृष्टि में समस्त प्राणियों में मानव  सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि वह स्वयं अपना व अपने चारों ओर फैली इस संपूर्ण सृष्टि के बारे में विचार कर सकता है, जिसके अनगिनत प्रश्न हो सकते हैं, जैसे कि मेरे चारों ओर फैली यह अद्भुत सुंदर सृष्टि, यह रंग बिरंगी दुनिया , विभिन्न प्रकार के लोग, अलग-अलग देश, अनगिनत चांद सितारे, यह सूरज दिन-रात, नदियां, ऊंची, ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, बर्फीले पहाड़, घने जंगल और उसमें अनगिनत सुंदर भी खूंखार भी सभी प्यारे जानवर, झीलें, तालाब और अनेक समुद्रों से भरी यह पृथ्वी जहां विभिन्न परंपराओं और विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले अनगिनत मनुष्य रहते हैं, और उनके द्वारा बनाई गई अनोखी कलाकृतियां जिनमें मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर बड़े-बड़े भव्य अनोखे राज महल अद्भुत पिरामिड और न जाने कितने अद्भुत निर्माण उनके द्वारा हुए हैं।              अनेक प्रकार की म...

जीवन दर्शन और विज्ञान। तीसरा लेख।

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                 मित्रों जीवन दर्शन और विज्ञान के इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। दर्शन और विज्ञान दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं परंतु दर्शन का उदय हमेशा विज्ञान से पहले ही होता है। दर्शन यानी देखना जब हम कुछ भी देखते हैं तो हमारे मन में जिज्ञासाए शुरू हो जाती हैं की आखिर ऐसा  होता क्यों है और सत्य क्या है यह जीवन क्या है और मुझे इनके बारे में विस्तार से जानना चाहिए असीम प्रकृति मनुष्य के चारों ओर विद्यमान है संपूर्ण प्रकृति में पांच तत्व माने गए हैं जल अग्नि पृथ्वी वायु और आकाश और दर्शन यह विचार भी करता है कि इन पांच तत्वों से भी पहले वह कौन सा एक तत्व है जिससे इन पांचों तत्वों का उदय होता है और जिसको हम परम सत्य  या  परमात्मा कहते हैं  वह कौन सी प्रक्रिया है जिससे उस एक तत्व से इन पांच तत्वों का उदय होने लगता है। बहुत से विद्वानों ने इस पर गहन विचार किया है तथा अपने अपने विचार व्यक्त किए हैं। इसी दर्शन के सहारे मानव मन हमेशा से जीवन के अनेक गूढ़ प्रश्नों के उत्तर खोजने में लगा ही रहता ह...