साधु, साधक, सिद्ध, संत और शैतान
साधु, साधक, सिद्ध, संत और शैतान.. इन पांचों की राशि तो एक ही होती है परंतु इन सब का स्वभाव और कार्य करने के तरीके अलग-अलग होते हैं। जिनमें से साधु एक परोपकारी प्रवृत्ति के व्यक्ति होते हैं और साधक एक किसी भी साधना में निश्चित समय के लिए वह चाहे तंत्र मंत्र या वैज्ञानिक जो भी हो उसमें क्रियाशील व्यक्ति को कहा जाता है, जो भी उसने कोई अपनी साधना का लक्ष्य बनाया होता है, उसकी प्राप्ति के लिए, वह अपना उद्यम करता रहता है और साधक कहलाता है। अपनी साधना में पूर्ण होने पर, योग और तंत्र की भाषा में, वह सिद्ध कहलाता है। और संत वह महापुरुष होते हैं, जो संसार से पार हो चुके होते हैं। वह ज्ञान की उस अंतिम अवस्था पर पहुंच चुके होते हैं जहां और कुछ प्राप्त करना शेष नहीं रहता। और शैतान जैसा कि नाम में ही छुपा है एक शरारती आत्मा या शक्ति और हमारा अपना मन भी जो कि सही गलत का विचार न करके किसी भी कार्य को करना और करवाना, इस प्रकार हमारा मन भी शैतानी हो सकता ...