जीवन दर्शन और विज्ञान
जीवन दर्शन और विज्ञान
इन तीन शब्दों में संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान समाया हुआ है। इस सृष्टि में समस्त प्राणियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि वह स्वयं अपना व अपने चारों ओर फैली इस संपूर्ण सृष्टि के बारे में विचार कर सकता है, जिसके अनगिनत प्रश्न हो सकते हैं, जैसे कि मेरे चारों ओर फैली यह अद्भुत सुंदर सृष्टि, यह रंग बिरंगी दुनिया , विभिन्न प्रकार के लोग, अलग-अलग देश, अनगिनत चांद सितारे, यह सूरज दिन-रात, नदियां, ऊंची, ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, बर्फीले पहाड़, घने जंगल और उसमें अनगिनत सुंदर भी खूंखार भी सभी प्यारे जानवर, झीलें, तालाब और अनेक समुद्रों से भरी यह पृथ्वी जहां विभिन्न परंपराओं और विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले अनगिनत मनुष्य रहते हैं, और उनके द्वारा बनाई गई अनोखी कलाकृतियां जिनमें मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर बड़े-बड़े भव्य अनोखे राज महल अद्भुत पिरामिड और न जाने कितने अद्भुत निर्माण उनके द्वारा हुए हैं।
अनेक प्रकार की मानव जातियां इस पृथ्वी पर रहती हैं और जैसे-जैसे स्थान व दूरी बदलती है मनुष्यों की जातियों भाषाओं व उनके रहन-सहन में परिवर्तन दिखाई देते है। अनगिनत मनुष्य इस पृथ्वी पर रहते हैं मगर कमाल है कि सोचने व समझने में थोड़ा थोड़ा अंतर अवश्य है और कुछ बातें सभी में समान भी हैं। इतनी विशाल सृष्टि आखिर कैसे बनी, कैसे विकसित हुई, क्या इसे किसी ने बनाया है? क्या इस पूरे खेल को कोई चलाने वाला कोई महान ईश्वर है? या यह स्वयं ही अंधेरे से प्रकाश के उच्चतम शिखरों की ओर विकसित होती जा रही है और यह मानव यानी कि मैं स्वयं भी जो सोच विचार कर रहा हूं, यह सोचने विचारने की शक्ति मुझ में कैसे है? और वह कैसे विकसित हुई है , अनगिनत प्रश्न है और इनका उत्तर पुरातन काल से ही सभी तलाशते आ रहे हैं । बड़े-बड़े विचारक, ज्ञानी, महापुरुष, फिलॉस्फर हुए हैं। सभी ने इस विश्व पहेली का अपने अपने ढंग से वर्णन किया कि आखिर यह इतनी सुंदर श्रृंखलाबद्ध सृष्टि कहां से आई और कैसे विकसित हुई, बहुत गहरी खोजबीन की गई योग और विज्ञान के अनेकों साधन अपनाए गए, रहस्य पर रहस्य सामने आते गए, बड़े- बड़े योगी ज्ञानी विज्ञानी खोजते- खोजते अपने -अपने विचार अपने- अपने ग्रंथों में लिखते गए । वह साहित्य हमें अपने प्राचीन ग्रंथों के रूप में प्राप्त होता है।
आओ मित्रों कुछ विचारों से शुरुआत करते हैं। मित्रों कुछ विचार करते हैं, कि यह जीवन दर्शन और विज्ञान आखिर है क्या ? मित्रों जीवन दर्शन में जीवन के हर पहलू, हर क्षेत्र व जीवन की समस्त गतिविधियों का विचार होता है। दर्शन यानी देखना किसी भी वस्तु को संपूर्णता से देखना उसे बारीकी से समझना उसमें खो जाना, तभी हमें सत्य की झलक मिलनी शुरु होती है। यह जीवन दर्शन वह ज्ञान है जो जीवन के परम सत्य और सिद्धांतों और उनके कारणों की विज्ञान के आधार पर विवेचना करता है तभी इसे जीवन दर्शन का विज्ञान कहा जाता है। जीवन दर्शन यानी फिलासफी ऑफ लाइफ, इसके साथ विज्ञान को जोड़ने से यह जीवन दर्शन का विज्ञान बन जाता है। एक फिलॉस्फर या एक ज्ञानी, ज्ञान का प्रेमी होता है वह हर समय ज्ञान की ही खोज में रहता है। जिसका भी वह दर्शन करता है, उसके बारे में वह संपूर्ण रूप से जानना चाहता है, उसमें डूब जाना चाहता है, उसके रहस्य को समझना चाहता है कि कोई भी चीज और इस सृष्टि के अनसुलझे रहस्य आखिर है क्या? मित्रों दर्शन सर्वत्र है। हम अपने को ही लें, हम स्वयं हमारा यह शरीर और इसमें देखने सुनने विचारने की जो अनेक शक्तियां हैं, वह कैसे कार्य करती हैं? यह शरीर कुछ समय तक जीवित रहता है और फिर मृत्यु की गोद में चला जाता है। क्या मेरा बस कुछ वर्षों का ही अस्तित्व है ? या मैं उससे कहीं अधिक हूं । मुझ में एक चेतना, एक विचार शक्ति एक जीवनी शक्ति, यानी एक आत्मा है और वह अजर- अमर है कभी नष्ट नहीं होती। मित्रों जब हम विचार करने लगते हैं तो हम अंधेरे से प्रकाश की ओर बढ़ने लगते है ।
मित्रों ज्ञानदर्शन हमारे चारों ओर है। हम भोजन करते है, रसोई में रोटी बनती है तो रोटी का भी एक दर्शन और विज्ञान है, वह भी किसी पदार्थ से बनी हुई है। वह पदार्थ या धान्य कहां से आया? वह कैसे खेत में उपजाया गया और आटे के रूप में हमारी रसोई में आया और इस प्रकार रोटी बनाने का भी एक विज्ञान है । रोटी बनाने में अग्नि, जल, वायु सभी की आवश्यकता होती है। यदि गहन विचार वर्णन करें तो एक रोटी पर ही विशाल ग्रंथ लिखा जा सकता है। मित्रों अपने बचपन मैं जब हम एक छोटे बालक थे और हमें कुछ थोड़ी समझ आनी शुरू हुई तभी से हमें अपने चारों दिखने वाली हर चीज के बारे में जानने की जिज्ञासा शुरू हो गई थी, और हम अपनी मां या अपने पिता से पूछते रहते थे। और इस प्रकार हम धीरे धीरे सीखते समझते बड़े होते गए और अब हम यहां पहुंच गए हैं कि हम संपूर्ण जीवन विज्ञान के बारे में ही विचार कर रहे हैं और इस अद्भुत विषय पर निरंतर विचार करते रहेंगे और आगे बढ़ते रहेंगे। मित्रों अपने आगे के निबंधों में हम योग और विज्ञान का हमारे जीवन में क्या महत्व है इस विषय पर चर्चा को जारी रखेंगे...

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