जीवन विचार मंच( प्रथम भाग)
पवित्रता की बात!... मित्रों जब भी कभी चार मित्र आपस में बैठकर कुछ चर्चा करते हैं या किसी धर्म सभा में किसी विषय पर चर्चा शुरू होती है कि कौन महात्मा है? कौन ढोंगी है? किस महिला का चरित्र अच्छा है? कौन दुशचरित्र है? कौन पतिव्रता है? कौन चोर है?कौन साधु है? उस ज्ञान चर्चा में, हम सभी अपना सुंदर पक्ष तो सबके सामने रखते हैं! अपनी दान और वीरता की कहानियां सबको सुना देते हैं और अंधेरे में की गई गलतियों को हम सभी छुपा कर रखते हैं! यदि हमने उन गलतियों से कुछ सबक लेकर कुछ सीख कर और प्रायश्चित करके उन्हें छोड़ दिया है! तो बहुत अच्छी बात है! और हमारी समझदारी है! लेकिन कुछ के लिए तो यह गलतियां गलतियां ही नहीं होती! बल्कि उनके आगे बढ़ने का, प्रसिद्धि पाने का मार्ग होती हैं! अपने इस लेख में हम पवित्रता और अपवित्रता के इसी विषय पर चर्चा करेंगे। एक छोटी सी कहानी… मित्रों वर्षों पुरानी बात है! उस समय मेरी एक छोटी सी कॉमिक्स, उपन्यास, पत्र पत्रिकाएं आदि किराए पर देने की, किताबों की...