जीवन में भर लो रंग सच्चे दोस्तों के संग।
जीवन में भर लो रंग सच्चे दोस्तों के संग!!
जितने सच्चे और गहरे हमारे दोस्त हैं! जीवन में उतना ही खुशियों का रंग भरा रहता है! जब यह शब्द मित्र! हमारे सामने आता है, तो हमें एक गहरे अपनेपन और साथ ही साथ एक सुरक्षा का भी एहसास होने लगता है। व्यक्ति के घर से बाहर निकलने पर उसकी पहली आवश्यकता उसके अपने मित्र ही होते हैं। जिनके साथ वह हर अच्छे बुरे पलों को व्यतीत करता है।हमारे भीतर से हमारा मन भी फोरन कह देता है, कोई भी दिक्कत आ रही है, तो क्या हुआ अपने दोस्त हैं न! दिल में हमेशा एहसास रहता है, कि दोस्त खड़े हैं! यह मुश्किल क्या करेगी ? अपने दोस्त के बारे में हमारी सोच कहती है कि उसके पास या मेरे पास कितना पैसा है, इस बात का ख्याल तो हम कभी करते ही नहीं, हम तो बस एक ही बात जानते हैं कि हम जो भी हैं जितना भर भी है और कैसी भी परिस्थिति हो दोनों एक साथ खड़े हो जाते हैं! और एक दूसरे के काम आते हैं, और हमेशा आएंगे। नित्य शाम को या जब भी मुलाकात होती है, तो हंसी मजाक और सुख- दुख की चर्चा में हम एक दूसरे की परेशानियों को खूब समझ लेते हैं और किसी भी समस्या का हल यूं ही बातों- बातों में ही निकाल लेते हैं।
दोस्तों हम भाग्यशाली हैं! यदि हमें या आपको अच्छा दोस्त मिल गया है! क्योंकि अच्छे दोस्त भी भाग्य से ही मिलते हैं। जीवन में समस्याएं तो आती रहती है और जाती रहती हैं, परंतु यदि हमारे अच्छे दोस्त हमारे साथ हैं तो हम बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी बड़ी आसानी से पार कर सकते हैं। दोस्तों आपने यह गाना तो सुना ही होगा "साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना, साथी हाथ बढ़ाना" दोस्तों सोचो! यदि हम अपने दोस्तों के साथ किसी पिकनिक पर जा रहे हैं, और वहां हम मस्ती में झूमते हुए यह गाना गाते हुए, आपस में मिलजुल कर भोजन या प्रसाद वितरण कर रहे हैं, तो समा कितना रंगीन और सुहाना हो जाएगा। ऐसे ही जब हंसते-खेलते हुए दिन गुजरते हैं, तो जीवन स्वर्ग बन जाता है । उन सच्चे दोस्तों में हमारी पत्नी हमारा सबसे गहरा और सच्चा दोस्त हो सकती है, बशर्ते कि हम उसके साथ भी एक अच्छे दोस्त की तरह ही पेश आएं और उसे अपनी सच्ची दोस्त और अर्धांगिनी बनाएं। हमारे माता- पिता, हमारे भाई, बहन यह सभी हमारे दोस्त हो सकते हैं, बशर्ते कि इनके साथ भी हम अपने सच्चे कर्तव्य और प्यार को निभाते चले, जब हम दूसरों के दुखों को अपना दुख समझेंगे तो सहज में ही हम सभी से दोस्ती कर पाएंगे और उस समय हमारी सारी मुश्किलें भी गायब होती जाएंगी।
सच्चे दोस्तों के अनेक उदाहरण हमारे इतिहास में मिलते हैं, भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती विश्व प्रसिद्ध है। बचपन में साथ पढ़ने वाले मित्रों की दोस्ती, जिनमें बड़े होकर एक देश का राजा बना और दूसरा एक गरीब ब्राह्मण ही बना रहा, लेकिन उनकी दोस्ती में कोई कमी नहीं आई और जब उस गरीब ब्राह्मण सुदामा पर गहरा संकट आया, और ऐसे समय में सुदामा अपने राजा मित्र से मिलने फटे हाल में ही उनके महलों में पहुंच गया और संकोच पूर्वक द्वारपाल से कहा कि अपने राजा से कहो कि सुदामा उनसे मिलने आया है! द्वारपाल से सुदामा का नाम सुनते ही श्री कृष्ण जी तत्काल सब कुछ छोड़ कर दौड़ते हुए बाहर आए और अपने मित्र को अपने गले से लगाया! फिर उन्हें अंदर लेकर आए और एक सुंदर सिंहासन पर बैठा कर उनके चरणों को बड़े प्रेम से हो धोने लगे और घर की कुशलक्षेम पूछने लगे, उनकी सभी रानियां भी उनकी सेवा में लग गई और सब कुछ जान कर सुदामा को बिना बताए ही उनकी गरीबी को दूर कर दिया । यह देखकर सभी आश्चर्यचकित हो गए! ऐसे दिव्य मित्र थे श्री कृष्ण जी और ऐसी ही थी उनकी दिव्य मित्रता जो कि बेमिसाल थी। जीवन के हर पड़ाव पर उन्होंने अपनी दोस्ती निभाई। बचपन में ग्वालो से और गोपियों से जिनमें उनकी प्रिय सखी श्री राधा जी से तो उनकी बहुत ही गहरी दोस्ती थी। बड़े होकर राजाओं से दोस्ती, फिर पांडवों से दोस्ती, जिनमें से धनुर्धर अर्जुन के साथ उनकी बहुत गहरी दोस्ती थी। राजा दुर्योधन और दानवीर कर्ण की भी दोस्ती अद्भुत और बेमिसाल थी। करण ने यह सब जानते हुए भी कि युद्ध में मेरे सामने मेरे भाई खड़े हैं, लेकिन सच्ची दोस्ती निभाते हुए दानवीर कर्ण ने मरते दम तक अपने प्रिय मित्र दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा।
“ फ्रेंडशिप डे” पूरे विश्व में! अगस्त के पहले रविवार को “ फ्रेंडशिप डे”के रूप में मनाया जाता है। इसके बारे में एक छोटी सी कहानी सुनी जाती है, सन 1935 में अमेरिकी अदालत के द्वारा एक व्यक्ति को फांसी की सजा दी गई। उस व्यक्ति का एक बहुत ही गहरा दोस्त था, उसे अपने दोस्त की फांसी का इतना दुख हुआ कि उसने स्वयं भी आत्महत्या कर ली। अमेरिकी सरकार ने उस व्यक्ति की भावनाओं की कद्र करते हुए उस दिन को फ्रेंडशिप डे के रूप में घोषित किया और तभी से "फ्रेंडशिप डे" की शुरुआत हुई ।हमें सच्चे दोस्तों अवश्य ही बनाने चाहिए और पहचानने भी चाहिए और मतलबी दोस्तों से सावधान भी रहना चाहिए क्योंकि ऐसे दोस्त ऊपर से दोस्ती का दिखावा करते हैं और अपना मतलब हल करने के लिए कभी भी कुछ भी कैसा भी नुकसान करने से नहीं चूकते। उसके लिए हमें बहुत ही बारीकी और सावधानी से उन्हें परखना होगा तभी हम जान पाएंगे कि यह असल में कौन सा मित्र सच्चा है? और कौन सा झूठा ?
दोस्ती की उम्र! कुछ लोग कहते हैं कि दोस्ती हमउम्र से ही हो सकती है, लेकिन शायद ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, दोस्ती किसी से भी, कहीं भी, और कभी भी हो सकती है। एक बालक और एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति की आपस में दोस्ती हो सकती है। एक बच्चे और एक बूढ़े की भी आपस में दोस्ती हो सकती है। दोस्ती में उम्र की शायद कोई सीमा नहीं होती । दोस्तों! जीवन के हर मोड़ पर हमें अनेक प्रकार के दोस्त मिलते हैं, कुछ हमारे बचपन के, कुछ किशोरावस्था के, कुछ ऑफिस में जहां हम काम करते हैं, वहां भी एक मित्र ग्रुप हो सकता है, उसमें कुछ हमारे अच्छे दोस्त हो सकते हैं। बस आवश्यकता होती है कि हम उन्हें पहचान लें। मित्रों दोस्ती से बढ़कर दुनिया में कोई दौलत नहीं होती। दोस्ती जीवन का सबसे खूबसूरत रिश्ता है! यह वह रिश्ता होता है, जो कि बिना किसी स्वार्थ के सदैव ही जीवन भर बना रहता है। हर इंसान के जीवन में, उसके कुछ खास दोस्त होते हैं जिनसे कि वह अपने दिल की हर बात कह सकता है। यदि आपके पास अच्छे दोस्त हैं तो आप सचमुच में अमीर हैं! जिसके पास सच्चे दोस्त नहीं हैं, चाहे दौलत उसके पास कितनी भी हो, वह व्यक्ति वास्तव में गरीब है। हर मुश्किल की घड़ी में सच्चे दोस्त एक दूसरे का साथ निभाते हैं। सच्चा मित्र हमें बुरे कार्यों से भी बचाता है। जब हम किसी गलत राह की तरफ जाते हैं, तो हमारा सच्चा मित्र ही हमें सावधान करता है, कि उसका यह रास्ता सही नहीं है।
दोस्तों जीवन में हमारा अनेक व्यक्तियों से परिचय होता है, इनमें से हमारे कई बहुत करीबी और खास दोस्त बन जाते हैं। आपके स्कूल हों या कॉलेज वहां भी एक बड़ी मित्र मंडली हो सकती है, लेकिन वास्तव में हमारे दोस्त कौन हैं? इस बात का फैसला तो हमारा दिल और दिमाग दोनों मिलकर ही कर सकते हैं। हम या आप उनमें से कुछ ही लोगों पर भरोसा कर सकते हैं। मित्रों दोस्ती एक ऐसा पवित्र बंधन है जैसा की एक बहन अपने भाई को राखी बांधकर प्रेम के बंधन में बांध लेती है, लेकिन दोस्ती तो प्यार का ऐसा बंधन है, इसमें दोनों मित्रों के दिल ही एक दूसरे से बंध जाते हैं। दोस्ती एक सच्चा धन है और जिसके पास यह है वही सच्चा अमीर है। सारांश में हम कह सकते हैं कि दोस्ती दोनों मित्रों के बीच एक सच्चे स्नेह का रिश्ता है
क्योंकि दोस्ती के बारे में जब संपूर्णता से वार्तालाप हो ही रहा है, तो एक बहुत ही सुंदर और सर्वत्र सुलभ और नम्र दोस्त का जिक्र भी यहां अवश्य ही होना चाहिए। और वह है हमारी अच्छी पुस्तकें। जो कि सदैव ही हमें समझाने और हमारा मार्गदर्शन करने को तैयार रहती हैं। जब हम पुस्तकालय में प्रवेश करते हैं, तो हजारों विचारकों के रूप में पुस्तकें हम से वार्तालाप करने को बेताब रहती हैं। वहां केवल आवश्यकता होती है, अपने दिलों को उनके पन्नों के रूप में खोलने की। कितनी सच्ची कहावत है ,"पुस्तक ज्ञान की कुंजी है" और जब यह ऐसी चीज है तो हमारी सच्ची मित्र तो है ही!.. और यह बात भी बिल्कुल सही है कि जो व्यक्ति जिस प्रकृति या नेचर का होता है वह वैसे ही मित्रों और पुस्तकों का चुनाव करता है।
सारांश..
मित्रों!जीवन में मित्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि मित्रता हमें जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखाती है। हम जीवन में मित्रता से बहुत कुछ सीखते हैं जो हमें कहीं और नहीं मिल पाता हैं। आप अपने परिवार के अलावा भी किसी और से प्यार करना सीखते हैं। आप अपने दोस्तों के सामने स्वयं को ही जाना सीखते हैं। दोस्तों इस लेख में इतना ही और आगे भी हम इस ज्ञान चर्चा में आगे बढ़ते रहेंगे आपका दिन शुभ हो आप हमेशा स्वस्थ रहें खुश रहें। ओम श्री परमात्मने नमः।

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