कमजोरी एक अभिशाप !
कमजोरी एक अभिशाप…
मित्रों कमजोरी, एक अभिशाप है! यह एक बहुत ही कड़वी सच्चाई और हकीकत है! इस दुनिया में हम जहां भी रहते हैं, जिस देश में भी रहते हैं, कहीं पर भी रहते हों, एक चीज जो हर जगह, सबसे ज्यादा महत्व रखती है, वह है शक्ति! मित्रों, शक्ति जहां भी होती है जिसके पास भी होती है उस जगह को या उस व्यक्ति को वह विशेष बना देती है! जो व्यक्ति किसी भी प्रकार से शक्तिशाली है! शारीरिक शक्ति के द्वारा! दिमाग की शक्ति के द्वारा! अध्यात्म की शक्ति के द्वारा! वही व्यक्ति इस दुनिया में सफल होता है! क्योंकि कमजोर व्यक्ति के द्वारा तो कोई भी कार्य हो ही नहीं सकता! और हमें भी इस गहरी सच्चाई को समझ कर, किसी भी प्रकार से शक्तिवान बनने का प्रयास करना चाहिए मित्रों! शक्ति के अनेक रूप होते हैं, जिनमें शक्ति का संचय, हम शारीरिक, मानसिक आध्यात्मिक, समाजिक किसी भी रूप में कर सकते हैं । हम व्यायाम योग और प्राणायाम करके अपने शरीर का अच्छी प्रकार से विकास करके, एक ताकतवर व्यक्ति बन सकते हैं। मानसिक रूप से अपना विकास करके हम एक अच्छे नेता, एक अच्छा वकील, अच्छा इंजीनियर और एक अच्छा वैज्ञानिक बनकर और इसके अलावा और भी अनेकों प्रतिभाएं हासिल करके उनकी शक्तियां भी प्राप्त कर सकते हैं ।
शक्ति की उपासना और
आराधना..मित्रों! शक्ति के अनगिनत रूप हैं! और हमें जहां तक भी संभव हो सके, जीवन में शक्ति की उपासना और आराधना करते रहना चाहिए। तभी हम इस दुनिया में अपने जीवन को अच्छी प्रकार से जी पाएंगे। मित्रों !हम अपने जीवन में तभी सफलता प्राप्त कर पाते हैं, जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि हम शक्तिशाली हैं! मजबूत हैं! तो दुनिया हमारे साथ है! और यदि हम कमजोर हैं! खाली हाथ हैं ! तो कोई हमारे साथ नहीं होगा, यही एक कड़वी सच्चाई है! एक ताकतवर व्यक्ति जहां से भी गुजरता है, सभी उसका स्वागत करते हैं! उससे बात करने में, उससे दोस्ती करने में, सभी को खुशी होती है! कल्पना करो, कि आप भारत में, या दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति आपके घर आ जाएं या कहीं मिल जाए! आप उन का तहे दिल से स्वागत अवश्य ही करेंगे! या करना चाहेंगे और मन में कहेंगे अरे! इतना बड़ा और ताकतवर आदमी! मेरे सामने! आपके मुंह से निकलेगा, आइए जी सम्मानीय व्यक्ति, आपका स्वागत है! क्योंकि वह जिस पोस्ट पर इस वक्त हैं, उनके हाथ में असीमित शक्तियां हैं ! उनसे दोस्ती हर कोई अवश्य ही करना चाहेगा! यही तो है, शक्ति की खासियत! ताकतवर होने का महत्व! और रहस्य! उसके विपरीत यदि आप कमजोर हैं! कहीं से भी, धन से! शरीर से! मानसिक रूप से! तब आपका साथ कोई भी बहुत ही मुश्किल से देना चाहेगा। आपके दोस्त, रिश्तेदार, आपके पड़ोसी.और संगी साथी आदि सभी आपको हीन भावना से देखेंगे! यदि किसी के साथ, आपकी पुरानी दोस्ती भी रही है, तो वह भी बड़ी मुश्किल से ही आप पर ध्यान देगा। दोस्तों इसका एक बड़ा कारण है, कि आपने समय पर, अपने आप पर, अपनी कार्यशैली पर, अच्छी प्रकार से कभी ध्यान नहीं दिया और हमेशा आलस्य भी करते रहे! इसी कारण धीरे-धीरे आपका सभी कुछ गिरता चला गया, और आप हर क्षेत्र और हर दिशा में कमजोर होते चले गए। आपने अपने जीवन में आए हुए, विकास के उन अनमोल अवसरों की इज्जत नहीं की! उन अवसरों से मिलने वाली शक्ति को नहीं पाया जिसके कारण आप कमजोर और असहाय हो गए हैं। शक्ति की आराधना का अर्थ केवल यह नहीं है कि आप किसी देवी की आराधना या पूजा पाठ करें! वैसे तो यह भी शक्ति प्राप्ति का एक तरीका तो हो सकता है! लेकिन दूसरे अन्य बहुत सारे क्षेत्र हैं, जिनमें हम मेहनत करके, आसानी से, सफलता हासिल करके, शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। सबसे पहले तो हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखना होगा! जिसके लिए हम योग और प्राणायाम को कर सकते हैं। अपने शरीर को स्वस्थ और मजबूत बना सकते हैं। दूसरी बात धन की शक्ति! मित्रों धन की भी एक बहुत बड़ी ताकत होती है! यदि आपके पास धन है! तो आपकी सेवा करने के लिए बहुत सेवक मिल जाएंगे! क्योंकि धन यनि लक्ष्मी का महत्व जीवन में बहुत ज्यादा होता है! बल्कि लक्ष्मी तो जीवन के हर पहलू और हर पल हमारे काम आती है! और हमारी सहायता के लिए हमेशा हमारे साथ खड़ी रहती है । इसलिए मित्रों यदि धन की शक्ति आपके पास है, तो यह आपके बहुत काम आएगी और आपके जीवन को बहुत आसान बना देगी। मित्रों! यह मुहावरा भी सच है कि यदि धन हमारे पास है तो दुनिया हमारे साथ है। यदि आपके पास यह भी नहीं है तो फिर आप और भी कमजोर हैं ।
एक छोटी सी सुंदर कहानी !..मित्रों धन की शक्ति के बारे में एक छोटी सी बड़ी सुंदर मनमोहक कहानी है कि एक बार भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी जी में इस बात पर बहस हो गई कि भक्ति और धन दोनों में किसका महत्व ज्यादा है! किस की शक्ति ज्यादा है! पहले श्री हरि ने एक भजन करने वाले साधु का रूप धारण किया और भजन गाते हुए पृथ्वी पर एक सेठ के द्वार पर पहुंचे सेठ अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति का था। वह उनके भजनों को सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ और आदर के साथ उन्हें भोजन कराया और फिर उनसे रुकने का और सत्संग करने का आग्रह किया। महात्मा जी ने कहा कि, ठीक है मैं आपके यहां रुकता हूं, लेकिन मैं सवा महीने का संकल्प लेकर ध्यान भजन और नित्य सत्संग भी करूंगा तुम बीच में विघ्न मत डालना। सेठ जी ने कहा कि महात्मा जी बिल्कुल ठीक है मैं आपसे वादा करता हूं कि आपकी साधना में कोई विघ्न नहीं आएगा और ना ही आपको कोई तकलीफ होगी। और फिर इस प्रकार महात्मा जी के रूप में श्री हरि वहां पर भजन और सत्संग नित्य ही करने लगे! आस पड़ोस के लोग भी सत्संग और भजन सुनने के लिए, आने लगे। वातावरण बहुत ही भक्तिमय हो गया था! महात्मा जी को भक्ति सत्संग करते हुए 15- 20 दिन व्यतीत हो गए थे। फिर एक दिन लक्ष्मी जी ने एक सुंदर सन्यासिनी का रूप धारण किया और उसी सेठ के द्वार पर पहुंची। सेठ जी ने उन्हें भी बहुत ही आदर के साथ बिठाया और भोजन कराया। लक्ष्मी जी ने भोजन किया तो उनके हाथ के स्पर्श से भोजन के वह सारे बर्तन सोने के हो गए! भोजन के पश्चात माताजी को दूध का गिलास दिया गया जैसे ही माताजी ने उस गिलास को स्पर्श किया तो वह भी सोने का हो गया! माताजी जिस चीज को छू रही थी, वह तुरंत ही सोने का होता जा रहा था! यह सब देख कर सेठ और उनका परिवार अत्यंत आश्चर्य में पड़ गया था! और फिर तो सारा परिवार माता जी के चरणों में गिर पड़ा और उनसे बारंबार वहां रुकने का आग्रह करने लगा! उनके इ तने आग्रह को देखकर, लक्ष्मी जी ने श्री हरि जी के निवास को देख कर कहा कि मैं उस जगह पर रहना चाहती हूं तो सेठ जी ने उत्तर दिया कि वहां एक बहुत ही अच्छे और महान आध्यात्मिक भजन करने वाले महात्मा जी ठहरे हुए हैं महात्मा जी का सवा महीने का नियम है आप उनसे मिलकर बहुत ही प्रसन्न हो जाएंगी! तब माता लक्ष्मी जी ने कहा कि, मैं तो उसी कमरे में ठहरना चाहती हूं! तुम महात्मा जी को दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दो तब तो सेठ जी उनसे अत्यंत विनम्र निवेदन करने लगे, 'कि माता जी' फिलहाल आप दूसरे और इससे भी अच्छे बड़े कमरे में विश्राम कीजिए महात्मा जी का नियम पूरा होने पर फिर आप उसी कमरे में रुक जाना लेकिन माताजी ने कहा कि वह तो उसी कमरे में ठहर सकती हैं वरना कोई बात नहीं मैं तो जा रही हूं तब तो सेठ जी तुरंत ही महात्मा जी के पास पहुंचे और उनसे विनम्र निवेदन किया कि महात्मा जी आप दूसरे, और इस से भी बड़े अच्छे कमरे में ठहर जाइए इस कमरे की हमें बहुत सख्त जरूरत है! लेकिन महात्मा जी ने कहा कि उनका तो सबा महीने का नियम है! वह इस नियम को नहीं तोड़ सकते! और इसी कमरे में रहेंगे! लेकिन सेठ जी ने फिर से प्रार्थना की, महाराज आप कृपया करके अपना नियम, दूसरे इस से भी बड़े कमरे में शुरू कर लीजिए ! लेकिन जब महात्मा जी ने उनकी बात नहीं मानी, तो सेठ को गुस्सा आ गया और उसने अपने नौकरी से जबरदस्ती महात्मा जी का सारा सामान बाहर निकलवा दिया और उन्हें भी कमरे से बाहर करवा दिया महात्मा जी बाहर निकल कर खड़े हो गए! सामने लक्ष्मी जी खड़ी मुस्कुरा रही थी! तब लक्ष्मी जी, एकदम से उनके पास आई और बोली आपने देखा प्रभु धन की शक्ति का चमत्कार ! इस दुनिया में सत्संग और भजन से भी ज्यादा धन की शक्ति की मान्यता है! आप अपने धाम में पहुंचो, पीछे से मैं भी आ रही हूं। मित्रों इस कहानी को कहने का अर्थ सिर्फ इतना ही है कि धन की शक्ति इस दुनिया में बहुत ज्यादा महत्व रखती है।
शक्ति साधना के अनेक क्षेत्र हैं, हमें उन सभी को निरंतर ही, अपने ध्यान में रखना चाहिए और अपने जीवन को सफल, सुंदर और खुशहाल बनाने के लिए, गंभीरता पूर्वक उन्हें पाने की कोशिश भी हमेशा ही करते रहना चाहिए, इन क्षेत्त्रों के बारे में जब हम कुछ विचार करते हैं, तो हम देखते हैं कि ….
सबसे पहले हमारा अपना शरीर है, हमें अपने शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने पर निरंतर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इस शरीर के द्वारा ही सभी धर्म और समाज के समस्त कार्य होते हैं।
दूसरी! धन की शक्ति उसके पश्चात धन को प्राप्त करना यनी धन की शक्ति को, हासिल करना अत्यंत आवश्यक है।
तीसरी! हमारे दोस्तों की शक्ति! हमें अपने इस मानव समाज में रहते हुए अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए अच्छे दोस्तों की बहुत आवश्यकता होती है इस प्रकार से दोस्तों की शक्ति भी अत्यंत आवश्यक है
चौथी! है तंत्र की शक्ति! यनि उपकरणों की शक्ति जिसमें हमें विचार करना होगा कि हमारे पास जीवन के कौन-कौन से अच्छे और मुख्य साधन उपलब्ध हैं जैसे कि हमारा अच्छा मकान! अच्छी गाड़ियां! खानपान और रहन-सहन के अच्छे साधन यह सभी तंत्र के क्षेत्र में आते हैं।
पांचवी है विद्या की शक्ति , विद्या अध्ययन! यनि ज्ञान अर्जन! हमें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए, विद्या प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है! और यह विद्या हमारे सामान्य जीवन में, स्कूल या विद्यालय की पढ़ाई या इसके अलावा तंत्र, मंत्र, यंत्र, योग, ज्योतिष आदि विद्या के अनेक साधन हो सकते हैं। इसके अलावा हमें शस्त्र विद्या का भी कुछ ज्ञान होना आवश्यक है।
इन सभी विद्याओं के माध्यम से, हम जीवन की अनेक आवश्यक शक्तियों को प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को समस्त खुशियों से भर सकते हैं।
यदि हमारा शरीर मजबूत है, तो हम एक पहलवान हो सकते हैं, हम एक अच्छे खिलाड़ी या फिर एक अच्छे धावक कुछ भी हो सकते हैं! और अपने जीवन को खुशहाल और सफल बना सकते हैं। ऐसा हो सकता है कि यदि हमारा शरीर बहुत अधिक मजबूत नहीं है तो हम पढ़ाई लिखाई में अच्छी मेहनत करके उसके द्वारा एक अच्छी नौकरी पा सकते हैं! जैसे कि एसीपी,डीसीपी, मजिस्ट्रेट, मिलिट्री में कर्नल की रैंक या और भी कोई रैंक हो सकती है इन में से हम किसी को भी प्राप्त करके एक अच्छी शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। हम एक अच्छे राजनेता हो सकते हैं! एक अच्छे पत्रकार हो सकते हैं! इस प्रकार की अनेकों बहुत सारे रास्ते हैं। यह भी एक शक्ति की ही उपासना है। इस शक्ति को कोई भी व्यक्ति अच्छी लगन के साथ पढ़ाई करके प्राप्त कर सकता है।
हमारी समझ और रुचि ..यदि हमारी समझ और हमारी रुचि का रुझान योगविद्या की ओर हो जाए और हम एक अच्छे गुरु के सानिध्य में योगविद्या का अभ्यास करें तब भी हम अपने शरीर और मन को अत्यधिक शक्ति की ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। ऐसा नहीं है यह विद्या सिर्फ भगवा कपड़े पहनने वाले सन्यासियों के लिए ही है! यह योग विद्या भी इस जीवन में शक्ति प्राप्ति का एक अमूल्य साधन है । जिसके द्वारा हम अपने शरीर मन की शक्ति को असीम संभावनाओं भरी ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं । इस विद्या के अभ्यास के द्वारा, हम अपनी आयु को भी बढ़ाकर अपनी जीवन यात्रा को काफी लंबा कर सकते हैं! और अपने जीवन में अध्यात्म की दिशा में काफ़ी उन्नति करके, आत्मा और परमात्मा का ज्ञान भी प्राप्त कर सकते हैं। यह केवल बात ही नहीं है! कि बस केवल किताब में लिख दिया और पढ़ लिया! बिल्कुल नहीं! बल्कि यह सब हकीकत में भी होता है! बस केवल आवश्यकता है, अपनी समझ को विकसित करने की, और फिर उसके अनुसार कार्य करने की और अपने इस जीवन को महत्वपूर्ण समझने की, कि हमारे जीवन का हर कदम, हर पहलू, बहुत अच्छा और सुंदर हो सकता है! बशर्ते कि हम अपने जीवन के प्रत्येक छोटे से छोटे कार्य या अवसर को भी बड़े ध्यान से इमानदारी से और अच्छी समझ के साथ करें! तो फिर भला हमारे जीवन का विकास कैसे नहीं होगा! अवश्य होगा ! और बहुत अच्छा होगा। मित्रों जीवन का हर पहलू खास ही होता है! और जीवन की हर दिशा भी खास ही होती है! जीवन में सभी कुछ जरूरी होता है! शरीर भी ,मित्र भी, सगे संबंधी भी, अपना परिवार भी और हमारा मानव समाज भी तभी तो एक सुंदर खुशियों भरे संसार का जन्म होता है।
शक्ति प्राप्ति के अवसर मित्रों इस जीवन में हमें शक्ति अर्जित करने के अवसर तो हमेशा मिलते ही रहते हैं! बस आवश्यकता है, हमें सजग रहने की! और उन आने वाले अवसरों का भरपूर लाभ उठाने कि! यदि हमें पढ़ाई करनी है, तो पूरी लगन के साथ! यदि हम किसी कार्य की ट्रेनिंग ले रहे हैं, तो वह भी पूरी लगन के साथ लेनी चाहिए। हमें अपनी दिनचर्या पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए कि, मैं कहीं कोई गलती तो नहीं कर रहा हूं! या अपने समय को व्यर्थ में ही बर्बाद तो नहीं कर रहा हूं ! मित्रों! हमें समय का पूरा सदुपयोग करना चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे, तो कोई कारण नहीं कि हम अपने जीवन उत्थान के सर्वोच्च शिखर को न छू लें! हम अवश्य ही जीवन में उच्चतम सफलता प्राप्त कर पाएंगे । हमारे पास अवसरों की कमी नहीं होती है! बस आवश्यकता होती है, उन अवसरों को खोज कर, उनका पूरा लाभ उठाने की, और उन सब अवसरों के प्रति हमारी सोच ऐसी होनी चाहिए कि, जो भी अवसर आ रहा है, चाहे छोटा ही सही, परंतु यह महत्वपूर्ण है! क्योंकि छोटी-छोटी ईटों से मिलकर ही, एक बहुत सुंदर ऊंची और मजबूत इमारत का निर्माण होता है! हमारी सोच ऐसी नहीं होनी चाहिए कि आज नहीं कल कर लूंगा! बस यहीं तो चूक होती है! और अवसर सामने से निकल जाता है। ऐसे ही बेकार विचारों के कारण, हम अनेक बार बहुत अच्छे अवसरों को भी खो देते हैं! और फिर यदि बाद में पछताए भी तो क्या होता है? जो होना होता है, वह तो हो चुकता है! मित्रों! एक क्षण भी, इस जीवन का, अत्यंत कीमती होता है! यदि वह समय, आपने बेकार गुजार दिया, तो कभी भी दोबारा नहीं मिलता है! बचपन के बाद जवानी आती है, अवसरों की भरमार, हमारे सामने खड़ी होती है! यही तो मौका होता है! जीवन को संवारने का! सजाने का! यदि चूक गए, तो फिर पछताना ही पड़ता है !और फिर कुछ भी नहीं होता! क्योंकि जो समय गुजर जाता है, लौट कर वापस कभी नहीं आता! यदि वक्त रहते, हमने शक्ति अर्जन नहीं किया तो बस फिर इस जीवन की गाड़ी को यूं ही खींचते रहना पड़ता है! और फिर यह जीवन उत्साह में नहीं, सिर्फ मजबूरी या निराशा में ही चलता रहता है।
कमजोरी और संघर्ष… मित्रों! यदि किसी भी कारण से, हम अपने जीवन में उसके किसी भी मोड़ पर किसी परिस्थिति या अपने शरीर से कुछ कमजोर पड़ गए हैं तो हमें अपने प्रत्येक कदम को बड़े ध्यान से रखना चाहिए क्योंकि जो वक्त गुजर गया वह तो गुजर गया वह तो वापस आएगा नहीं उस भूतकाल की चिंता छोड़ कर हमें आज से, अभी से, और यहीं से ही अपने समय का पूरा सदुपयोग करते हुए कठिनाइयों से जूझते हुए कूटनीति से कुशल बुद्धि से आगे बढ़ते हुए चलना होगा तो हम काफी हद तक अपने बिगड़े हुए अतीत को सुधार भी सकते हैं । मित्रों कमजोरी में हमारा यह जीवन नर्क के समान ही होने लगता है, जीवन के हर एक मोड़ पर कमजोरी में सम्मान घटने लगता है! हमें कमजोरी के समय, यनि मुसीबत के समय, बहुत ही संभल कर चलना होता है! बड़े ध्यान से! जैसे कि नट! जब रस्सी के ऊपर चलता है, तो उसका पूरा ध्यान अपने पैरों और रस्सी पर ही होता है! ध्यान से यदि चूका तो वह गिरा ! इसी प्रकार से यदि हम कमजोरी में, ध्यान से नहीं चलेंगे तो कहीं भी गिर सकते हैं! धोखा खा सकते हैं !अपमानित हो सकते हैं ! इसलिए उस खराब समय को संभल कर, और समझ कर ही व्यतीत करना चाहिए। मित्रों! कमजोर जो, असल में, है ही कमजोर! कि वह कोई भी चीज संभाल कर रख ही नहीं सकता या फिर रख नहीं पाया! तो फिर उसे दिया ही क्यों जाए? इसलिए उसे कोई भी कुछ भी देना ही नहीं चाहता! क्योंकि उसने तो सभी को इंडिकेशन दे ही दिया है कि, मैं तो हूं ही कमजोर! और मुझे कुछ मत देना! यह बातें सिर्फ उन आलसी और निकम्मे व्यक्तियों के लिए हैं, जो अपने जीवन में ना कुछ करना चाहते हैं और ना आगे बढ़ना चाहते हैं ! उनके लिए नहीं जो किसी कारण से, यदि कमजोर भी हो गए हैं, तो निराश ना होकर, हमेशा ही आगे बढ़ने का प्रयास करते रहते हैं और न ही हमारे आदरणीय बुजुर्ग बार हैं! जो कि बढ़ती उम्र के पड़ाव पर जाकर थोड़े कमजोर दिख रहे हैं! उनके पास तो सम्मान और उनके सुनहरे अतीत की खूबसूरत ताकत चमक रही है! उनको तो प्रणाम है !
शक्तिअर्जन का प्रयास… मित्रों इन सब बातों को, कहने का मतलब यही है कि, हमें जीवन में सदैव ही, शक्ति प्राप्त करने की भरपूर कोशिश करते रहना चाहिए। क्योंकि शक्ति के द्वारा ही समस्त कार्य संपन्न होते हैं। यदि आप शक्तिवान हैं! मशहूर हैं !ताकतवर हैं! तो हर कोई आपकी बात सुनेगा! यदि आप कमजोर हैं! तो कोई भी आपकी बात को नहीं सुनेगा, बल्कि आप को धक्का देकर पीछे कर दिया जाएगा! क्योंकि ताकत की तो महिमा ही ऐसी है ! शक्ति सब को धकेल कर पीछे कर देती है !और खुद आगे खड़ी हो जाती है! शक्तिवान के इशारों पर ही दुनिया चलती है! कहा भी है, वसुंधरा वीर भोग्या! इस धरती पर हमेशा ही, शक्तिशाली पुरुषों का ही राज्य रहा है, उन्हीं की हुकूमत चली है, उन्होंने ही इतिहास को लिखा है! और इतिहास को मोड़ भी दिया है! कमजोरी में आप के हजारों अपमानित करने वाले नाम होंगे! जैसे डरपोक, दब्बू ,निकम्मा, अभागा, मूर्ख, किसी काम का नहीं, चल निकल पतली गली से! जिंदा रहना है कि नहीं! एक लगाऊंगा, ठीक हो जाएगा !चल लंगड़े! अरे डरपोक भाग जा यहां से! ए कमजोर मनुष्य! यह सुंदर दुनिया! तेरे लिए तो असुंदर ही है! वह सुंदर लड़की! यह खूबसूरत दुनिया! ऐशो आराम! तेरे लिए कुछ नहीं है! इसके लिए तो संघर्षवान ! ताकतवर! और बहादुर बनना पड़ता है! लेकिन मित्रों दोस्ती की भी ताकत होती है यदि हमारी सच्ची और अच्छे मित्रों से दोस्ती है तो वह भी हमारी एक ताकत है और हम उस के बल पर भी अपने जीवन को खुशनुमा बना सकते हैं!
एक दिलचस्प किस्सा… मित्रों एक छोटा सा किस्सा, आपको सुनाता हूं, कुछ समय पहले, मैं एक रोडवेज की बस में, सफर कर रहा था! एक स्पीड ब्रेकर के पास, बस कुछ हल्की हो गई थी, मानौ रुक सी गई थी, तभी वहां पहले से ही तैयार खड़ा हुआ, एक लंगड़ा सा कमजोर व्यक्ति, उसमें ऊपर चढ़ने लगा तो कंडक्टर ने उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया! लेकिन तभी एक ताकतवर पहलवान उसमें चढ़ा और उसने कंडक्टर को एक धक्का मारा और कंडक्टर से बोला, "पीछे हट, तेरे बाप की बस है" और खुद तो चढ़ा ही! उस लंगड़े और कमजोर व्यक्ति को भी सहारा देकर उठाया और चढ़ाया! बस कंडक्टर थोड़ा घबरा कर बोला, भाई साहब यह कोई बस रुकने का स्टैंड तो नहीं है! पहलवान व्यक्ति ने कहा,अबे चल परे, बकवास करता है! अबे जब सवारी खड़ी है! तो चढ़ाता क्यों नहीं ?तेरे बाप की गाड़ी है क्या? यदि कोई मजबूर या असहाय व्यक्ति है तो क्या हम उसकी सहायता नहीं कर सकते? उस पहलवान व्यक्ति ने आंखें तरेर कर कहा! कंडक्टर की बोलती बंद हो गई थी! उसे अच्छी सीख भी मिल गई थी! क्योंकि शक्ति सामने जो खड़ी हो गई थी! और शक्ति के आगे तो झुकना ही पड़ जाता है! शक्ति के बिना अच्छाई और परोपकार भी असहाय हो जाते हैं! शक्ति का महत्व सबसे खास है! कानून का पालन भी, शक्ति के द्वारा ही होता है! पुलिस भी बदमाशों को ताकत के बल पर ही काबू करती है! हाथ जोड़कर और नमस्ते करके नहीं! कि बदमाश जी कृपया करके आ जाइए और हमारी गाड़ी में बैठ जाइए! हमारे पास आपका अरेस्ट वारंट है! हम आप को जेल में बंद कर देंगे! क्या कभी ऐसे हो सकता है? ऐसे तो कभी हो ही नहीं सकता।
उपसंघार… इस संसार में कोई भी कार्य बिना शक्ति के हो ही नहीं सकता! शक्ति के द्वारा ही हर काम होता है, और हो सकता है! आप जंगल में जा कर देखिए वही जीवित रहता है, जो ताकतवर होता है! कमजोर तो हमेशा ही मारा जाता है! एकता में भी शक्ति होती है! बहुत सारे जंगली कुत्ते मिलकर ,अकेले सबसे ताकतवर जानवर शेर का भी शिकार कर लेते हैं। यहां हमें एकता की शक्ति दिखाई पड़ती है! जैसे के हमारे मानव समाज में, यदि हमारे बहुत सारे सच्चे मित्र हैं और उस समय यदि कोई भी गंभीर संकट या बड़ा दुश्मन हमारे सामने आ जाए और हमारे सारे मित्र हमारे साथ खड़े हो जाएं तो हमारा हौसला आसमान पर चला जाता है और हम अपने आप को बहुत ही शक्तिशाली महसूस करते हैं और उस संकट का सामना बड़ी ही आसानी से कर पाते हैं। मित्रों! परमात्मा शिव भी! शक्ति के साथ! मिलकर ही समस्त कार्य करते हैं! बिना शक्ति के शिव भी शव जैसे ही दिखाई पड़ते हैं !


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