जीवन में फूल और कांटे !
हमारी पसंद फूल या कांटे… फूल और कांटे तुम्हें क्या पसंद है! एक लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड से पूछा? तो उसने उत्तर दिया, 'फूल तो सभी को पसंद हैं' परंतु मुझे दोनों ही पसंद है! वह कैसे? प्रेमिका ने फिर पूछा? वह ऐसे डियर सुनो, 'तुम एक बहुत ही खूबसूरत फूल हो' मेरे प्रति तुम्हारा स्वभाव अत्यंत प्रेम भरा है, लेकिन तुम्हारे स्वभाव में कुछ कांटे भी तो हो सकते हैं! यनी तुम्हारी कुछ नाराजगियां भी हो सकती हैं! तुम्हारा कभी रूठना भी तो हो सकता है! इसलिए मुझे तुम्हें संपूर्ण रूप से पाने के लिए तुम्हारे फूल और कांटे दोनों को ही स्वीकार करना होगा! और फिर किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिए थोड़ी बहुत कठिनाइयां तो होती ही हैं, इसलिए फूल और कांटे अक्सर दोनों साथ ही रहते हैं या मिलते हैं, हमें दोनों को ही स्वीकार कर लेना चाहिए। मित्रों! वास्तव में यदि देखा जाए, तो फूल भी हमें तभी मिलते हैं, जब हम कांटों के मार्ग या संघर्ष के मार्ग से चल कर इनके पास पहुंचते हैं। मित्रों फूल सुंदर होते हैं! बहुत कोमल होते हैं! खुशबूदार होते हैं! आकर्षक रंगों से बने होते हैं! और इनसे हमें कोमलता और प्यार का एहसास भी मिलता है! यदि हमें किसी को सेलिब्रेट करना होता है, उसे कुछ गिफ्ट करना होता है, तो हम फूलों से ही करते हैं! क्योंकि फूल से बढ़कर दूसरा कोई खूबसूरत और कोमल तोहफा कौन सा हो सकता है? किसी के बर्थडे पर, किसी की एनिवर्सरी पर, और किसी को विवाह के अवसर पर, भेंट देने के लिए, किसी भी प्रकार के प्रेम प्रदर्शन के लिए या किसी को भी सम्मान देने के लिए, हम फूलों को ही भेंट करते हैं! जिन्हें सभी पसंद करते हैं! क्या ऐसे समय में हम उन्हें कांटे भेंट कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं! क्योंकि कांटे का तो मतलब ही होता ही है चुभना! या चुभाना! या कहो कि उस का घोर अपमान करना!यह बात सभी जानते हैं कि ऐसे अवसरों पर हम, भेंट या गिफ्ट रूपी फूलों के द्वारा अपने संबंधों को और भी अधिक प्रगाढ़ बनाना और आत्मिक बनाना चाहते हैं और इसके लिए फूलों की भेंट सबसे बेस्ट और सबसे सुंदर होती है जो कि लगभग सभी को पसंद भी आती है। लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि जिस प्यार या आत्मीयता को हम प्राप्त करना चाहते हैं या जिस प्रेम के संदेश को हम दूसरों तक पहुंचाना चाहते हैं वहां तक या उसके पास तक पहुंचने के लिए हमें अक्सर काफी संघर्षों का सामना करना पड़ता है या कहें कि कांटो की राह से गुजरना पड़ता है या कांटो के मार्ग से पहुंचना पड़ता है। यनि यह जो प्यार भरा फूलों का संदेश है! जो प्रेम की खुशबू है, वह हमें कांटों के साथ ही मिलती है। और इस प्रकार फूल और कांटे का साथ हमारे जीवन में हमेशा बना ही रहता है।
जीवन में कांटो का महत्व…मित्रों जब भी हम यह गीत सुनते हैं कि राही ओ राही! रुक जाना नहीं… तू कहीं हार के! कांटो पे चलके, मिलेंगे साऐ बहार के! तो एक बहुत ही प्रेरणादायक संदेश हमारे हृदय में गूंजने लगता है! कि इस जीवन के सफर की राह में, हमें बहुत सारे कांटे या कहो कि संघर्ष मिलने वाले हैं! लेकिन कोई बात नहीं, हमें तो अपनी राह पर आगे बढ़ते ही जाना है, और राह में आने वाले इन कांटों से भी, बहुत कुछ सीख कर, अपने आप को इतना मजबूत बनाना है, कि मंजिल खुद ब खुद हमारी ओर दौड़ी चली आए! मित्रों जीवन एक फूल की भांति बहुत ही सुंदर, कोमल और खूबसूरत है! लेकिन हमें इसकी सुंदरता को निरंतर कायम रखने के लिए, इस जीवन को खुशनुमा बनाने के लिए, कांटों के मार्ग से भी तो गुजरना होगा! कोमल तो हमें होना ही चाहिए, क्योंकि कोमलता में ही तो, सुंदर फूल जैसा प्यार छुपा होता है! लेकिन किन्ही अवसरों पर हमें कांटों की भांति कठोर भी होना पड़ता है! या होना चाहिए। यदि हमारे फूल जैसे कोमल जीवन को, या हमारे फूल जैसे किसी दोस्त को, या किसी साथी को, यदि कोई छेड़ना या उसे अपमानित करना या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है, तो हमें कठोर होकर उसका जवाब कठोरता से ही देना होगा। उस समय वह हमारी प्रतिक्रिया या हमारा प्रतिकार, एक कांटे के समान या फिर एक तीर की भांति ही होगा। तभी तो हम सामने वाले को समझा पाएंगे, कि ऐ मिस्टर! जरा इधर भी देख लो, यह मेरा हाथ नहीं हथोड़ा है, कोई गुस्ताखी मत कर देना! बस इतना काफी है! और फिर भी अगर जरूरत पड़ भी जाए तो फिर हथोड़ा चलाना भी पड़ सकता है। मित्रों! मौके पर जवाब देना बहुत जरूरी होता है, यदि उस समय आपने कठोरता से उसका जवाब नहीं दिया, तो उस फूल की रक्षा कैसे हो पाएगी? इसलिए वक्त पड़ने पर कांटा या हथियार या कठोरता या शक्ति प्रदर्शन अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यदि आप में कठोरता या विरोध रूपी शक्ति कुछ कम है, तो आपको उसे बढ़ाना पड़ेगा! वरना तो यह दुनिया आपको कदम-कदम पर अपमानित और प्रताड़ित करती ही रहेगी। कोई भी कार्य हो, कोई भी क्षेत्र हो, कुछ भी करना हो, कहीं जाना हो, आगे बढ़ना हो, हर क्षेत्र में शक्ति बहुत जरूरी है! शक्तिहीन के लिए शायद इस दुनिया में कहीं भी जगह नहीं है! कमजोर से यह दुनिया सब कुछ छीन लेती है! चाहे मजाक में ही सही! हंसी करते रहेंगे और उसे अपमानित भी करते रहेंगे। किसी ने सच ही कहा है कि इस दुनिया में कमजोर होना पाप है! इसलिए हमें ताकतवर बनने की कोशिश करनी चाहिए। ताकतवर के सभी दोस्त बन जाते हैं! क्योंकि सभी जानते हैं कि यदि कुछ चालाकी या धूर्तता दिखाई तो एक घुसेंड पड़ेगा! और अकल ठिकाने आ जाएगी! मित्रों यह शक्ति भी दो प्रकार की होती है, पहली शारीरिक और दूसरी मानसिक यनि पहले तो हमारा शरीर स्वस्थ, मजबूत और ताकतवर होना जरूरी है,और दूसरा हमारा मानसिक विकास हमारी पढ़ाई लिखाई, इस पर भी हमें ध्यान देना होगा। मित्रों! मानसिक ताकत हम अच्छी पढ़ाई करके, कोई विशेष योग्यता हासिल करके भी प्राप्त कर सकते हैं जैसे कि हम बड़े आई ए एस ऑफिसर बन सकते हैं, कोई पुलिस ऑफिसर बन सकते हैं, मजिस्ट्रेट बन सकते हैं, जज बन सकते हैं, क्योंकि इन सब की भी एक ताकत होती है जो कि हम अच्छी पढ़ाई और मेहनत करके प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए मित्रों! जीवन में शक्ति अर्जन बहुत जरूरी है।
एक सुंदर और जोशीली कहानी… मित्रों यदि आप कहीं से भी, किसी भी प्रकार से, थोड़े भी कमजोर हैं, तो आपके खास मित्र, आपके सहपाठी, या खास रिश्तेदार भी, सभी आपकी उस कमजोरी का फायदा उठाकर, आपकी हंसी उड़ाने से, आप को अपमानित करने से नहीं चूकेंगे। मित्रों एक पुरानी कहानी है, महर्षि परशुराम जी के माता-पिता महर्षि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ एक साधारण तपस्वी जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनकी माता रेणुका की बहन पास के ही एक राजा सहस्त्रार्जुन की पत्नी थी, एक दिन माता रेणुका अपनी बहन को अपने घर खाने के लिए आमंत्रित करने गई, तो उसकी बहन ने अपने पति से पूछा, कि मेरी बहन आप को भोजन के लिए निमंत्रित करना चाहती है' तो राजा ने अपनी राजशक्ति के घमंड में चूर होकर कहा, 'कि वह निर्धन ऋषि मुझे क्या भोजन कराएगा' उसने उन्हें अपमानित करने के लिए, अपनी पत्नी से कहा, 'कि अपनी बहन से कहो, यदि वह हमें भोजन कराना चाहती हैं, तो हमें हमारी सेना सहित जिमाना पड़ेगा यदि उन्हें यह मंजूर हो तो ठीक है! उसकी बहन ने रेणुका से जब इस प्रकार कहा, तो रेणुका यह सुनकर चुपचाप चली आई और उदास होकर बैठ गई! उनके पति ऋषि जमदग्नि ने उनसे पूछा कि क्या बात है? तुम उदास हो? तब उसने सारी बात बताई, तो उन महान तपस्वी ऋषि जी ने कहा कि जाओ, तुम उन्हें सेना सहित निमंत्रण देकर आओ! पति की आज्ञा पाकर रेणुका खुशी-खुशी अपनी बहन को, उसकी सेना सहित भोजन का निमंत्रण देकर आ गई। जमदग्नि ऋषि एक महान तपस्वी थे! वह उसी समय देवताओं के राजा इंद्र के पास गए और उनसे कामधेनु गाय मांग लाए, और उनकी दिव्य शक्ति की सहायता से, उन्होंने राजा और उसकी सेना के सहित, सभी लोगों के लिए भोजन की संपूर्ण सामग्री, कुछ ही समय में तैयार कर दी। प्रातः काल राजा सहसरार्जुन अपनी सेना के सहित वहां आया, तो ऋषि ने उन सभी को अत्यंत स्वादिष्ट भोजन कराया! तब तो राजा अत्यंत आश्चर्य में डूब गया! कि इस ऋषि ने रात ही रात में, इतनी भोजन की सामग्री कहां से प्राप्त की? और उसे कैसे बनाया? उसने अपने गुप्तचरों को इस रहस्य का पता लगाने के लिए भेजा, तो उसे पता लगा कि उनके पास तो कामधेनु गाय है! तब राजा ने ऋषि के पास जाकर कहा कि आप यह गाय मुझे दे दो, ऋषि ने कहा कि यह गाय मेरी नहीं है, यह तो राजा इंद्र की है, लेकिन राजा ने जबरजस्ती उनकी गाय को छीन लिया! जब ऋषि ने प्रतिकार किया तो उसने अपनी तलवार से उनका सिर काट दिया! और गाय को लेकर वहां से जाने लगा, तो कामधेनु अपनी शक्ति के प्रभाव से सीधे स्वर्ग में देवराज इंद्र के पास चली गई। माता रेणुका अपनी पति की लाश को देखकर बिलख-बिलख कर रोने लगी! महर्षि परशुराम जी दूर कहीं तपस्या कर रहे थे, कि अचानक उनका ध्यान भंग हो गया! तब उन्होंने ध्यान लगाकर देखा कि कुछ घोर अनिष्ट हो गया है। वे तुरंत ही अपनी शक्ति के प्रभाव से, पल भर में ही अपनी माता के पास पहुंच गए, और अपने पिता की लाश को देखकर और इस घटना की सारी जानकारी लेकर कहने लगे, 'माता पहले मैं अपने शत्रु को मार कर आता हूं! फिर पिता का दाह संस्कार करूंगा। और फिर उसी समय राजा की सभा में पहुंच गए और अपनी प्रचंड शक्ति के द्वारा! राजा को उसकी सेना के सहित खत्म कर दिया! और फिर आकर अपने पिता का दाह संस्कार किया। सोचो यदि उनके पास शक्ति न होती तो वे रोने की सिवाय क्या कर सकते थे! श्री शंकर जी भी शक्ति के साथ ही अच्छे लगते हैं यदि शिव में शक्ति नहीं है तब तो फिर वह शव ही हो जाते हैं। शक्तिहीन को सभी कायर और मुर्ख समझते हैं।
उपसंघार… मित्रों हमें फूलों के साथ-साथ कांटों से भी प्यार करना और सीखना होगा! क्योंकि यह कंटक मार्ग! यनी यह जो कांटो भरा रास्ता है, यही तो हमारी साधना का मार्ग है! यही योग, तंत्र और विद्या अध्ययन का मार्ग है, जहां हमें घोर मेहनत और तपस्या करनी पड़ती है, तभी हम एक बदसूरत पत्थर से सुंदर अनमोल मूर्ति में! यानी एक विद्यावान और गुणवान मनुष्य में बदल सकते हैं, जिसके पास अनेकों गुण और शक्तियां होती हैं।मित्रों कांटे जीवन में बहुत ही आवश्यक और सहायक होते हैं! हमें हर प्रकार से सीख देते हैं, हमारी हिम्मत को मजबूत करते हैं, क्योंकि जब हम कांटों भरी परीक्षा से गुजर कर आते हैं, तो हम अपने आपको बहुत ही मजबूत महसूस करते हैं। मित्रों हमें पुष्प रूपी आराम की आवश्यकता तो हर समय ही होती है! लेकिन उसका एहसास हमें इस सुंदर कंटक मार्ग से गुजरने के बाद ही होता है। यदि हम फूलों को प्राप्त करना चाहते हैं! उनसे प्रेम करना चाहते हैं! तो हमें कांटों से भी प्रेम करना ही होगा! कांटों से प्रेम करने का मतलब है, हमें मेहनती और कर्मठ होना होगा! तभी हम विद्यावान बनेंगे। हमें अपने आलस्य को त्यागना होगा! हमें गुरु के चरणों में बैठकर विद्याओं को, शिक्षाओं को, मेहनत से सीखना होगा! यही हमारा कंटक मार्ग, यनि विद्या सीखने का मार्ग है। तभी हम एक सच्चे मनुष्य बन पाएंगे! और फिर अपने जीवन को सफल कर पाएंगे। इसके विपरीत यदि हम कुछ भी मेहनत न करें, यूं ही आलसी और निकम्मे हो जाए, तो हम जीवन के इस सुख, आराम या फूलों के एहसास को पहचान नहीं पाएंगे। क्योंकि जब हम दुख को देखेंगे! तभी तो सुख को पहचानेंगे! इसलिए हमें कांटों से प्यार करना भी बहुत जरूरी है! तभी हम मजबूत होकर फूलों से प्यार करने के लायक बन पाएंगे! क्योंकि यह कांटा ही तो हमें सजग रहने का,अपनी रक्षा करने का मंत्र बताता है। मित्रों! यह दुनिया, दुष्टों और राक्षसों से भरी पड़ी है, उनकी दुष्टता और अपमानित करने की प्रवृत्ति, कभी खत्म नहीं होती! और जब ऐसा मौका आ जाए, और उस समय आप यदि कमजोर हैं और उस समय चाहे उनके पैर भी पकड़ ले, उनके सामने रोये! गिड़गिड़ाए! तो भी वे आपके ऊपर थोड़ी भी दया नहीं करेंगे! और ना ही वह आपकी कुछ सुनेंगे, बल्कि आपका सब कुछ लूट लेंगे! उस समय हमें कांटे के समान, एक चट्टान के समान, कठोर होकर, उन को नष्ट करना बहुत आवश्यक हो जाता है, वरना जीवन बेकार हो जाता है! इसलिए मित्रों जीवन में फूल भी आवश्यक हैं! तो कांटे उनसे भी ज्यादा आवश्यक हैं! इसलिए हम कह सकते हैं, कि फूल भी सुंदर हैं, तो कांटों की भी अपनी अनोखी सुंदरता है! मित्रों! यह जीवन सचमुच बहुत सुंदर हैं! लेकिन हमें इसे बहुत ही गहराई से समझना होगा और दुख के बीच सुख को! और कांटों के बीच फूलों को! तलाशना होगा और तब हमारा जीवन भी एक सुनहरे कमल के समान खिल जाएगा! मित्रों! इस लेख में इतना ही, आपका दिन शुभ हो! जीवन खुशनुमा और अत्यंत सुंदर बने! लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद।





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