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कमजोरी एक अभिशाप !

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  कमजोरी एक अभिशाप…            मित्रों कमजोरी, एक अभिशाप है! यह एक बहुत ही कड़वी सच्चाई और हकीकत है!  इस दुनिया में हम जहां भी रहते हैं, जिस देश में भी रहते हैं, कहीं पर भी रहते हों, एक चीज जो हर जगह, सबसे ज्यादा महत्व रखती है,  वह है शक्ति! मित्रों, शक्ति जहां भी होती है जिसके पास भी होती है उस जगह को या उस व्यक्ति को वह विशेष बना देती है! जो व्यक्ति किसी भी प्रकार से शक्तिशाली है! शारीरिक शक्ति के द्वारा! दिमाग की शक्ति के द्वारा! अध्यात्म की शक्ति के द्वारा! वही व्यक्ति इस दुनिया में सफल होता है! क्योंकि कमजोर व्यक्ति के द्वारा तो कोई भी कार्य हो ही नहीं सकता! और हमें भी इस गहरी सच्चाई को समझ कर, किसी भी प्रकार से शक्तिवान बनने का प्रयास करना चाहिए मित्रों! शक्ति के अनेक रूप होते हैं, जिनमें शक्ति का संचय, हम शारीरिक, मानसिक आध्यात्मिक, समाजिक किसी भी रूप में कर सकते हैं ।  हम व्यायाम योग और प्राणायाम करके अपने शरीर का अच्छी प्रकार से विकास करके, एक ताकतवर व्यक्ति बन सकते हैं। मानसिक रूप से अपना विकास करके हम एक अ...

अमरता का मार्ग…

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  अमरता का मार्ग… . क्या अमर होने का कोई रास्ता है ? तो मेरी समझ और ज्ञान के अनुसार तो इसका उत्तर है, कि बिल्कुल है! और अवश्य है! अमर होने का रास्ता, सच्चे ज्ञान की प्राप्ति है! यदि हमें सच्चा ज्ञान प्राप्त हो जाए! तो हमें अमर होने का मार्ग भी मिल ही जाएगा! अत्यंत प्राचीन काल से ही, मनुष्य अमर होने का रास्ता खोजता रहा है! सभी चाहते हैं, खासकर मनुष्य! कि वह अजर और अमर हो जाए! और हमें भी ऐसी  सच्ची खोज में लगना चाहिए, जो की बहुत ही सुंदर बात है! और मित्रों सुनिए वह रास्ता है! सत्य की खोज! कि वास्तव में सत्य क्या है? और असत्य क्या है? इस विचार पर गहन मनन और चिंतन करना!  हमें सत्य और असत्य के बारे में जानना है! गीता में भी लिखा है कि "असत् का तो का अस्तित्व ही नहीं है, और सत्य का अभाव नहीं है" यानी कि जो है सो है! और जो नहीं है, वह कभी नहीं हो सकता है! इसका सीधा सा अर्थ है कि जो जैसा है, हमेशा वैसा ही रहेगा! लेकिन उसका विकास और रूपांतरण अवश्य हो सकता है!  यदि हम अमर हैं! तो अवश्य हैं! और यदि नहीं हैं, तो किसी भी उपाय से हो ही नहीं सकते? मित्रों जब हम अपने चारों ओर दृष्टि...

जीवन में फूल और कांटे !

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                  हमारी पसंद फूल या कांटे…   फूल और कांटे तुम्हें क्या पसंद है! एक लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड से पूछा? तो उसने उत्तर दिया, 'फूल तो सभी को पसंद हैं' परंतु मुझे दोनों ही पसंद है! वह कैसे? प्रेमिका ने फिर पूछा? वह ऐसे डियर सुनो, 'तुम एक बहुत ही खूबसूरत फूल हो' मेरे प्रति तुम्हारा स्वभाव अत्यंत प्रेम भरा है, लेकिन तुम्हारे स्वभाव में कुछ कांटे भी तो हो सकते हैं!  यनी तुम्हारी कुछ नाराजगियां भी हो सकती हैं! तुम्हारा कभी रूठना भी तो हो सकता है! इसलिए मुझे तुम्हें संपूर्ण रूप से पाने के लिए  तुम्हारे फूल और कांटे दोनों को ही स्वीकार करना होगा! और फिर किसी भी चीज को प्राप्त करने के लिए थोड़ी बहुत कठिनाइयां तो होती ही हैं, इसलिए फूल और कांटे अक्सर दोनों साथ ही रहते हैं या मिलते हैं, हमें दोनों को ही स्वीकार कर लेना चाहिए। मित्रों! वास्तव में यदि देखा जाए, तो फूल भी हमें तभी मिलते हैं, जब  हम कांटों के मार्ग या संघर्ष के मार्ग से चल कर इनके पास पहुंचते हैं। मित्रों फूल सुंदर होते हैं! बहुत ...

जीवन विचार मंच( प्रथम भाग)

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  पवित्रता की बात!...   मित्रों जब भी कभी चार मित्र आपस में बैठकर कुछ चर्चा करते हैं या किसी धर्म सभा में किसी विषय पर चर्चा शुरू होती है कि कौन महात्मा है? कौन ढोंगी है? किस महिला का चरित्र अच्छा है? कौन दुशचरित्र है? कौन पतिव्रता है? कौन चोर है?कौन साधु है? उस ज्ञान चर्चा में, हम सभी अपना सुंदर पक्ष तो सबके सामने रखते हैं! अपनी दान और वीरता की कहानियां सबको सुना देते हैं और  अंधेरे में की गई गलतियों को हम सभी छुपा कर रखते हैं! यदि हमने उन गलतियों से कुछ सबक लेकर कुछ सीख कर और प्रायश्चित करके उन्हें छोड़ दिया है! तो बहुत अच्छी बात है! और हमारी समझदारी है! लेकिन कुछ के लिए तो यह गलतियां गलतियां ही नहीं होती! बल्कि उनके आगे बढ़ने का, प्रसिद्धि पाने का मार्ग होती हैं! अपने इस लेख में हम पवित्रता और  अपवित्रता के इसी विषय पर चर्चा करेंगे।                 एक छोटी सी कहानी… मित्रों वर्षों पुरानी बात है! उस समय मेरी एक छोटी सी कॉमिक्स, उपन्यास,  पत्र पत्रिकाएं आदि किराए पर देने की, किताबों की...

जीवन का सफर और उसकी ज्ञान यात्रा( सातवां भाग)

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  स्वयं को समझना… मित्रों हम इस दुनिया में रहते हैं,  हमारा एक नाम है, हमारी एक पहचान है, हमारा एक परिवार भी है, हम जानते हैं कि यह हमारे माता-पिता हैं,  यह हमारे भाई बहन हैं, हम इस नगर, इस देश या इस कस्बे में रहते हैं, जिनका कोई ना कोई नाम भी अवश्य है। मित्रों हमारा जो नाम है, जो हमारे माता-पिता ने रखा है! उस नाम के पुकारने पर हमें लगता है कि हमें किसी ने बुलाया! वह नाम कोई दूसरा भी हो सकता था और हम उसे बदल भी सकते हैं! क्या हमारा जो नाम है, हम वही हैं? नाम तो इस भौतिक शरीर की पहचान है, लेकिन जो इसके भीतर चैतन्य तत्व बोल रहा है, समझ रहा है, इस शरीर के द्वारा, समस्त कार्य करवा रहा है वह तत्व कौन सा है? वह तत्व क्या है? यानी कि हम विचार करने के लिए  कह सकते हैं, कि मैं कौन हूं? इसी ज्ञान को गहराई से समझने पर, इसे ऋषि मुनियों द्वारा आत्मज्ञान का नाम दिया गया है! हमें इसी आत्मा के ज्ञान को समझना है! यही सच्चे सुख का ज्ञान है।                  एक दिव्य कथा… मित्रों! एक समय महर्षि वशिष्ठ जी और भगवा...