अमरता का मार्ग…
अमरता का मार्ग….
क्या अमर होने का कोई रास्ता है? तो मेरी समझ और ज्ञान के अनुसार तो इसका उत्तर है, कि बिल्कुल है! और अवश्य है! अमर होने का रास्ता, सच्चे ज्ञान की प्राप्ति है! यदि हमें सच्चा ज्ञान प्राप्त हो जाए! तो हमें अमर होने का मार्ग भी मिल ही जाएगा! अत्यंत प्राचीन काल से ही, मनुष्य अमर होने का रास्ता खोजता रहा है! सभी चाहते हैं, खासकर मनुष्य! कि वह अजर और अमर हो जाए! और हमें भी ऐसी सच्ची खोज में लगना चाहिए, जो की बहुत ही सुंदर बात है! और मित्रों सुनिए वह रास्ता है! सत्य की खोज! कि वास्तव में सत्य क्या है? और असत्य क्या है? इस विचार पर गहन मनन और चिंतन करना! हमें सत्य और असत्य के बारे में जानना है! गीता में भी लिखा है कि "असत् का तो का अस्तित्व ही नहीं है, और सत्य का अभाव नहीं है" यानी कि जो है सो है! और जो नहीं है, वह कभी नहीं हो सकता है! इसका सीधा सा अर्थ है कि जो जैसा है, हमेशा वैसा ही रहेगा! लेकिन उसका विकास और रूपांतरण अवश्य हो सकता है! यदि हम अमर हैं! तो अवश्य हैं! और यदि नहीं हैं, तो किसी भी उपाय से हो ही नहीं सकते? मित्रों जब हम अपने चारों ओर दृष्टि डालते हैं, तो हम देखते हैं, कि यहां तो सभी कुछ नाशवान है! हर चीज जो भी उत्पन्न हो रही है, उसका नाश भी अवश्य होता है! हमारा यह शरीर भी एक दिन अवश्य ही काल के गाल में समा जाएगा! तब फिर यह अमर होने का शब्द कहां से आया? कोई कैसे अमर हो सकता है? हर किसी की मृत्यु निश्चित है! मरना तो अवश्य ही है! लेकिन हमें यह समझना होगा कि क्या हम केवल यह शरीर ही हैं? या इस शरीर के भीतर कोई और भी शक्ति है ! जो कभी नहीं मरती! जो एक शरीर को छोड़ती है, तो दूसरे शरीर को ग्रहण कर लेती है! यही तो लोक और परलोक का ज्ञान और विज्ञान है! जब हम यह समझ लेते हैं, कि हम केवल एक शरीर नहीं हैं! हमारे भीतर एक जीवनी शक्ति है, जोकि इन पंच तत्वों से बने इस शरीर से परे है! जिस पर इन भौतिक गतिविधियों का कोई प्रभाव नहीं होता है वह अजर और अमर है और परम चैतन्य हैं! हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इस विषय पर बहुत ही खोज की है, गहन मनन और चिंतन किया है! ज्ञान, ध्यान, योग, प्राणायाम की अनेक विधियों को विकसित किया है! और उन्होंने हमारी इस जीवनी शक्ति के अमर होने के ज्ञान को भी गहराई से समझा है! कि यह हमारी जीवनी शक्ति या आत्मा तो वास्तव में सदैव से ही अजर और अमर है ! इसके साथ ही साथ, जब हम अपने योग गुरुओं के द्वारा बताए गए, योग मार्ग का अनुसरण करते हैं और हम यम नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि के मार्ग पर चलते हैं! तो हम अपने इस भौतिक शरीर को भी अपनी आत्मा की अमरता में हिस्सा दिला सकते हैं! यानी हम अपनी आयु को हजारों साल तक बढ़ा सकते हैं! और फिर यदि उसके बाद भी हमें आवश्यकता पड़ती है, तो हम इस शरीर को बदल सकते हैं! और अपने हिसाब से इस में परिवर्तन कर सकते हैं! अनेकों रूप धारण कर सकते हैं! अपनी शक्ति को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं! पल भर में कहीं भी जा सकते हैं! कुछ भी कर सकते हैं! लेकिन इसके लिए हमें बहुत ही सच्चे मन से गहन प्रयास और योग साधना करनी होंगी! और ऐसे सच्चे महापुरुषों की खोज भी करनी होगी, जो हमें इस रास्ते पर चलना सिखा सकें !हमें सच्ची ईमानदारी के साथ ज्ञान और विज्ञान को समझ कर चलना होगा! तभी हम इस मार्ग में प्रगति कर पाएंगे! और अपने शरीर को भी अमरता में हिस्सा दिला पाएंगे!
अनेकों महान साधक.. ऐसे बहुत से महापुरुषों के बारे में कहा जाता है, कि वह अमर हैं! या चिरंजीवी हैं! जैसे कि हम सब ने सुन रखा है, कि श्री हनुमान जी, श्री परशुराम जी, अश्वत्थामा जी, श्री महावतार बाबाजी! और भी अनेकों नाम हो सकते हैं! यह सब महापुरुष हजारों वर्षों से, इसी पृथ्वी पर अपने उसी पुरातन शरीर के साथ विद्यमान हैं! और निरंतर लीला कर रहे हैं! उन्होंने अपने दिव्य ज्ञान और योग साधना के द्वारा अपने शरीर की शक्तियों को इतना विकसित कर लिया है कि उनका शरीर भी! आत्मा की अमरता में हिस्सा ले रहा है! और यदि लाखों वर्षों के बाद, इस शरीर को बदलना भी पढ़े तो कोई परेशानी की बात नहीं हो सकती! क्योंकि जैसे पुराने वस्त्रों को त्याग कर,आदमी नए वस्त्रों को ग्रहण कर लेता है! उसी प्रकार से यह शरीर भी बदलना आवश्यक होता है! इससे हमें डरने की आवश्यकता नहीं है! क्योंकि वैसा करना जरूरी भी हो जाता है! इसका कारण है, कि इस भौतिक जगत में तो परिवर्तन सदैव होते ही रहते हैं और इनमें परिवर्तन तो होना है ही लेकिन अपने मूल रूप में, अपने सत्य रूप में! अपने आत्मिक रूप में! तो हम वास्तव में सदैव ही अजर और अमर हैं!
तंत्र और योग के अद्भुत रहस्य… मित्रों हजारों योग साधक और तंत्र विज्ञान के साधक इसी रहस्य खोज में हमेशा लगे रहते हैं कि किस प्रकार हम अपने ज्ञान और विज्ञान को इतनी ऊंचाइयों पर ले जाएं, कि हम अपने शरीर को भी अपनी इच्छा के अनुसार बना सकें! जैसा हम चाहें उसे वैसा ही परिवर्तित भी कर सकें। मित्रों वास्तव में कुछ भी असंभव नहीं है! अब आप अपने सामान्य जीवन में देखें, कि एक लोहे का टुकड़ा, जब जल के और वायु के स्पर्श में आता है तो उस पर जंग लग जाता है! और वह कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है! नष्ट हो जाता है! इस पर जब खोज हुई और जंग रहित लोहे यनि स्टील को (stainless-steel) को खोजा गया, जिसमें जंग नहीं लगता! कुतुब मीनार के पास गड़े, हुए लौह स्तंभ से यह दिखाई पड़ता है कि हमारे पूर्वजों ने इस पर काफी खोज भी की है और उन्होंने अपनी खोज और विज्ञान के द्वारा लोहे को भी जंग रहित और लंबे समय तक टिका रहने वाला बना दिया था। बस आवश्यकता होती है, इस पर खोज करने की, उसके रहस्यों को समझने की! इसी प्रकार से, हमें अपने जीवन के रहस्यों को भी, जानने और समझने की गहन आवश्यकता है! और योग, ध्यान, विज्ञान और समाधि के द्वारा केवल उसकी शुरुआत होती है! और उसके बाद भी बहुत लंबा सफर हमें तय करना होता है! और वह सफर कितना लंबा होगा इसके बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता है! इस प्रकार की खोजें हमेशा होती रहती हैं। पहले भी बहुत प्रयास हुए हैं, और हमें भी इस पर प्रयास करते रहना ही चाहिए! तभी तो हम इस जीवन के रहस्यों को कुछ जान और समझ पाएंगे।
आप जरा अत्यंत ध्यान से विचार करें जब से आपने होश संभाला है, बिल्कुल बचपन में जाएं और आज जब आपकी काफी उम्र हो चुकी है, कभी आपको ऐसा लगा है कि मैं कुछ कम हो रहा हूं! मेरा चैतन्य! मेरी जानने की शक्ति! यह मेरी जीवनी शक्ति! जो इस शरीर को चला रही है, कुछ कम हो रही है! या मेरा चैतन्य कुछ बिखर रहा है! आपको हमेशा बस ऐसा ही लगता होगा कि मैं बस हूं और सदैव हूं! जागृत अवस्था हो, स्वप्न की अवस्था हो, सुषुप्ति हो, सभी अवस्थाओं में बस आप ही आप होते हैं! कहीं भी आप को अपने अभाव का कोई विचार तक नहीं होता है! बल्कि यह जानना भी कि, आत्मा या यह जीवनी शक्ति कुछ नहीं है! यह भी इस चैतन्य शक्ति ही से सिद्ध होता है। आपने गीता में पढ़ा होगा कि सत्य का अभाव नहीं है, और असत्य का अस्तित्व ही नहीं है! यदि आप सत्य नहीं होते तो आप होते ही नहीं! यदि आप हैं, सत्य हैं, तो सदैव हैं, शाश्वत और अनंत हैं!
उपसंघार… मित्रों हमें अमर होने के बारे में सच्चे आत्मज्ञान के द्वारा ही पता चलता है। इस विषय में पुनर्जन्म कि अनेकों कहानियां भी हम हमेशा सुनते ही रहते हैं! और इनमें सच्चाई भी है! जब कोई साधक अपनी सरल और सच्ची ईमानदारी के साथ, इस विषय में खोज करते हुए इस मार्ग पर आगे बढ़ता है, तो वह अवश्य ही इस मार्ग के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त कर पाता है। लेकिन मित्रों इसके लिए हमें सच्चे ध्यानी और योगी गुरु की शरण में या उनके मार्गदर्शन में ही मेहनत करनी होगी अपने जीवन को उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ाना होगा! तभी हम इस अमरता के मार्ग को समझ पा सकते हैं! और समझ पाएंगे!



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